देश के अनेक लोधी समाज के कार्यक्रमों , सम्मेलनों और महा सम्मेलनों में प्रतिभागिता करने के बाद मेरे अनुसार लोधी जाति को निम्नांकित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:-
1.ब्राह्मण लोधी
2.क्षत्रिय लोधी
3.वैश्य लोधी
4.दलित लोधी
1.ब्राह्मण लोधी - इस वर्ग केदो उप वर्ग किए गए हैं-
(क) सुपर ब्राह्मण लोधी
(ख) अपर ब्राह्मण लोधी
ब्राह्मण लोधी वे लोधी हैं,जो अपने को लोधी समाज का सबसे ऊपर का और सर्वश्रेष्ठ हिस्सा मानते हैं । इनमें सुपर ब्राह्मण लोधी वे हैं ,जो किसी प्रदेश में किसी भी राजनीतिक दल के विधायक, सांसद, केबिनेट मंत्री,राज्यमंत्री आदि हैं । ये अन्य अधिकारियों, विशेषकर लोधी अधिकारियों से चरण - चुम्बन करवाना अपना विषेशाधिकार समझते हैं।
अपर ब्राह्मण लोधी वे हैं, जो आई ए एस, आई आर एस, आई पी एस, एस डी एम आदि हैं। ये सभी नेतागणों के आगे-पीछे चलने वाले अति महत्वाकांक्षी लोग हैं, जिनके पास लोधी समाज को आगे बढ़ाने के लिये अनेक रास्ते, सुझाव औऱ सुविधाएं हैं । लेकिन वे कितना पहुंचा पाते हैं या लोधी समाज जितना ग्रहण कर पाता है, ये अलग बात है। अधिकतर अधिकारी अपनी जाति छुपाकर नौकरी करते हैं और समाज के लिए इनकी कोई भी उपादेयता नहीं है। इसी लुका -छिपी में ये अपनी नौकरी पूरी कर लेते हैं और सेवा निवृत्त होकर घर बैठ जाते हैं। इन्हें समाज से कोई मतलब नहीं ।अपने पद के अहंकार में ये ऐसे डूबे रहते हैं कि अड़ौसी -पड़ौसी भी इन्हें दूर से ही सलाम करते हैं। सामने आने पर नमस्ते तो सभी कर लेते हैं, किंतु पीठ पीछे यही कहते सुने जातेहैं कि इसने समाज और जाति के लिए कुछ नहीं किया , केवल अपने बच्चों और रिश्तेदारों को नौकरी जरूर दिलवा दी। इस प्रकार अपर ब्राह्णण लोधी वर्ग के भी दो उपवर्ग हैं - एक समाजोपयोगी, दूसरा समाज अनुपयोगी।
2.क्षत्रिय लोधी - क्षत्रिय लोधी समाज का वह वर्ग है, जो नेताओं , विधायकों , सांसदों , मंत्रियों और बड़े लोधी अधिकारियों की छत्रछाया में पलता है औऱ आम लोधी जन को उन के पास भी नहीं फटकने देता। इस श्रेणी में उनके अंगरक्षक, पाले हुए गुंडे, बदमाश आते हैं। जो केवल उनकीं रक्षा की भूमिका का निर्वाह करते हैं। लोधी समाज की रक्षा में उनका शून्य प्रतिशत योगदान है।हाँ, सामान्य लोधियो को डाँटने, फटकारने , कुर्सियों से उठाकर बाहर खड़ा करने , किसी कर भी मान -सम्मान की खटिया खड़ी कर देने में इनका बहुत बड़ा योगदान हैं। सचिवालयों , संसदों में तेल मालिश और काले को सफेद करने में क्षत्रिय लोधियो की अहम भूमिका है।
3.वैश्य लोधी - इस वर्ग के अंतर्गत वे लोधी आते हैं जो चंदा दाता हैं ,या चंदा संग्राहक हैं।समाज के तमाम व्यवसायी, वकील, इंजीनियर आदि इस वर्ग के स्वामी हैं। निजी स्वार्थ या निस्वार्थ वश ये सभी धन एकत्रीकरण और व्यय का लेखा-जोखा रखते हैं। केवल अपने बच्चों या किसी व्यावसायिक महत्वाकांक्षावश ये समाज का धन समाज की सेवा में लगाने में तत्पर रहते हैं।
4.दलित लोधी - ये लोधी समाज का ऐसा उपेक्षित औऱ जनसेवी वर्ग है , जिससे दरियाँ बिछवाने , कुर्सियां लगवाने , टेंट सजवाने आदि की व्यवस्था कराने का काम वैश्य
1.ब्राह्मण लोधी
2.क्षत्रिय लोधी
3.वैश्य लोधी
4.दलित लोधी
1.ब्राह्मण लोधी - इस वर्ग केदो उप वर्ग किए गए हैं-
(क) सुपर ब्राह्मण लोधी
(ख) अपर ब्राह्मण लोधी
ब्राह्मण लोधी वे लोधी हैं,जो अपने को लोधी समाज का सबसे ऊपर का और सर्वश्रेष्ठ हिस्सा मानते हैं । इनमें सुपर ब्राह्मण लोधी वे हैं ,जो किसी प्रदेश में किसी भी राजनीतिक दल के विधायक, सांसद, केबिनेट मंत्री,राज्यमंत्री आदि हैं । ये अन्य अधिकारियों, विशेषकर लोधी अधिकारियों से चरण - चुम्बन करवाना अपना विषेशाधिकार समझते हैं।
अपर ब्राह्मण लोधी वे हैं, जो आई ए एस, आई आर एस, आई पी एस, एस डी एम आदि हैं। ये सभी नेतागणों के आगे-पीछे चलने वाले अति महत्वाकांक्षी लोग हैं, जिनके पास लोधी समाज को आगे बढ़ाने के लिये अनेक रास्ते, सुझाव औऱ सुविधाएं हैं । लेकिन वे कितना पहुंचा पाते हैं या लोधी समाज जितना ग्रहण कर पाता है, ये अलग बात है। अधिकतर अधिकारी अपनी जाति छुपाकर नौकरी करते हैं और समाज के लिए इनकी कोई भी उपादेयता नहीं है। इसी लुका -छिपी में ये अपनी नौकरी पूरी कर लेते हैं और सेवा निवृत्त होकर घर बैठ जाते हैं। इन्हें समाज से कोई मतलब नहीं ।अपने पद के अहंकार में ये ऐसे डूबे रहते हैं कि अड़ौसी -पड़ौसी भी इन्हें दूर से ही सलाम करते हैं। सामने आने पर नमस्ते तो सभी कर लेते हैं, किंतु पीठ पीछे यही कहते सुने जातेहैं कि इसने समाज और जाति के लिए कुछ नहीं किया , केवल अपने बच्चों और रिश्तेदारों को नौकरी जरूर दिलवा दी। इस प्रकार अपर ब्राह्णण लोधी वर्ग के भी दो उपवर्ग हैं - एक समाजोपयोगी, दूसरा समाज अनुपयोगी।
2.क्षत्रिय लोधी - क्षत्रिय लोधी समाज का वह वर्ग है, जो नेताओं , विधायकों , सांसदों , मंत्रियों और बड़े लोधी अधिकारियों की छत्रछाया में पलता है औऱ आम लोधी जन को उन के पास भी नहीं फटकने देता। इस श्रेणी में उनके अंगरक्षक, पाले हुए गुंडे, बदमाश आते हैं। जो केवल उनकीं रक्षा की भूमिका का निर्वाह करते हैं। लोधी समाज की रक्षा में उनका शून्य प्रतिशत योगदान है।हाँ, सामान्य लोधियो को डाँटने, फटकारने , कुर्सियों से उठाकर बाहर खड़ा करने , किसी कर भी मान -सम्मान की खटिया खड़ी कर देने में इनका बहुत बड़ा योगदान हैं। सचिवालयों , संसदों में तेल मालिश और काले को सफेद करने में क्षत्रिय लोधियो की अहम भूमिका है।
3.वैश्य लोधी - इस वर्ग के अंतर्गत वे लोधी आते हैं जो चंदा दाता हैं ,या चंदा संग्राहक हैं।समाज के तमाम व्यवसायी, वकील, इंजीनियर आदि इस वर्ग के स्वामी हैं। निजी स्वार्थ या निस्वार्थ वश ये सभी धन एकत्रीकरण और व्यय का लेखा-जोखा रखते हैं। केवल अपने बच्चों या किसी व्यावसायिक महत्वाकांक्षावश ये समाज का धन समाज की सेवा में लगाने में तत्पर रहते हैं।
4.दलित लोधी - ये लोधी समाज का ऐसा उपेक्षित औऱ जनसेवी वर्ग है , जिससे दरियाँ बिछवाने , कुर्सियां लगवाने , टेंट सजवाने आदि की व्यवस्था कराने का काम वैश्य
वर्ग द्वारा कराया जाता है। इस वर्ग में शिक्षक, क्लर्क तथा अन्य छोटे कर्मचारी गाँव के भीड़ बढ़ाने वाले लोग होते हैं।
ये ट्रैक्टर , बसें , आदि भरकर कार्यक्रम स्थल पर पहुँचते हैं। यही इनकी कार्य सिद्धि है।
इससे से स्प्ष्ट है कि लोधी समाज संतरे की फाँकों की तरह अनेक वर्गों में विभाजित है।जैसे संतरा ऊपर छिलके की तरफ से एक दिखता है, किन्तु अंदर पूर्ण विभाजन है। हर फांक अलग- अलग ही है। दिखावा ये किया जाता है कि सभी एक हैं , पर वास्तविकता तो संतरे को इन कार्यक्रमों में खुलने पर ही ज्ञात होती है।इन कार्यक्रमों में शिक्षकों को कोई महत्व नहीं दिया जाता ।वहाँ प्राइमरी , जूनियर ,इंटर, डिग्री कालेज आदि सभी को केवल मास्साब का सम्मान देकर टेंट के बाहर खड़ा कर दिया जाता है, चाहे वह 70 वर्ष का वरिष्ठ नागरिक ही क्यों न हों। समाज के सर्व प्रतिश्ठित शिक्षक का अवमूल्यन ,अपमान औऱ अप्रतिष्ठा अगर कहीं देखनी हो, तो बड़े -बड़े लोधी सम्मेलनों में जाइए। वहाँ केवल चमचे औऱ चापलूसी करने वाले लोधियो को ही मालाओं से सुसज्जित किया जाता है। बस आपके अंदर तेल मालिश और मक्खन लगाने की कला आनी चाहिए।
इस प्रकार लोधी जाति:एक समीक्षा का यह प्रकरण "जाति वर्गीकरण"समाप्त हुआ।
💐शुभमस्तु!
✍🏼©लेखक: डॉ.भगवत स्वरूप राजपूत "शुभम"
इससे से स्प्ष्ट है कि लोधी समाज संतरे की फाँकों की तरह अनेक वर्गों में विभाजित है।जैसे संतरा ऊपर छिलके की तरफ से एक दिखता है, किन्तु अंदर पूर्ण विभाजन है। हर फांक अलग- अलग ही है। दिखावा ये किया जाता है कि सभी एक हैं , पर वास्तविकता तो संतरे को इन कार्यक्रमों में खुलने पर ही ज्ञात होती है।इन कार्यक्रमों में शिक्षकों को कोई महत्व नहीं दिया जाता ।वहाँ प्राइमरी , जूनियर ,इंटर, डिग्री कालेज आदि सभी को केवल मास्साब का सम्मान देकर टेंट के बाहर खड़ा कर दिया जाता है, चाहे वह 70 वर्ष का वरिष्ठ नागरिक ही क्यों न हों। समाज के सर्व प्रतिश्ठित शिक्षक का अवमूल्यन ,अपमान औऱ अप्रतिष्ठा अगर कहीं देखनी हो, तो बड़े -बड़े लोधी सम्मेलनों में जाइए। वहाँ केवल चमचे औऱ चापलूसी करने वाले लोधियो को ही मालाओं से सुसज्जित किया जाता है। बस आपके अंदर तेल मालिश और मक्खन लगाने की कला आनी चाहिए।
इस प्रकार लोधी जाति:एक समीक्षा का यह प्रकरण "जाति वर्गीकरण"समाप्त हुआ।
💐शुभमस्तु!
✍🏼©लेखक: डॉ.भगवत स्वरूप राजपूत "शुभम"
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